इटावा- अब चुनाव के बाद हरिकिशोर तिवारी अपने ब्राह्मणवाद पर कितने खरे उतरेंगे यह तो चुनाव के बाद ही तय होगा

राजनीति

इटावा।इस समय आगरा स्नातक एमएलसी क्षेत्र से हरिकिशोर तिवारी जी बेहद चर्चा में है।ये प्रत्याशी इसलिये चर्चा में नही है कि इन्होंने ब्राह्मण समाज के उत्थान के लिये बहुत खास समपर्ण किया है,बल्कि यह प्रत्याशी सिर्फ इसलिये चर्चा में है क्योंकि ये प्रत्याशी महज अपने फायदे के लिये अपने निर्वाचन क्षेत्र ने एक ब्राह्मण नेता के रूप में अपने को स्थापित कर इस चुनाव को जीत लेना चाहता है।जबकि इस प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी ने अब तक सिर्फ अपने परिवार को आर्थिक रूप से सम्रद्ध करने की ही राजनीति की है।
कोरोना काल में कहां गायब रहे हरिशंकर तिवारी जी
जब यूपी में कोरोना महामारी को लेकर लोकडाउन था।तब शहर के चर्चित समाजसेवी सुधीर त्रिपाठी जी व शहर के प्रमुख व्यवसायी पंकज तिवारी नगर के गरीबो में पूरे लोकडाउन पीरियड तक घर घर खाना व राशन सामग्री पहुंचाने का काम करते रहे।शहर के हर्ष नगर मोहल्ले के रहने वाले समाजसेवी सुधीर त्रिपाठी ने एक एक लिष्ट बनाकर कोरोना काल मे प्रतिदिन शहर के प्रत्येक गरीब ब्राह्मण के घर-घर जाकर कम्प्लीट राशन सामग्री वितिरित करवाई।तब आगरा स्नातक क्षेत्र के प्रत्याशी हरि शंकर तिवारी जी का ब्राह्मणवाद कहाँ आराम फरमा रहा था?तब आपकी आत्मा ने यह आवाज नही दी कि आप भी गरीब ब्राह्मणों की सुध ले लेते।
अपने कॉलेज के ब्राह्मण कर्मियों के शोषण के लिये जाने जाते हैं हरिकिशोर की प्रबंधन टीम
हमारी टीम ने जब आपके स्वार्थी ब्राह्मणवाद की तह में जाकर जांच पड़ताल की तो पाया कि इनके शिक्षण संस्थान में तैनात ब्राह्मण कर्मियों का ही सबसे ज्यादा शोषण अपने किया है।हालांकि अपने शोषण से परेशान उन कर्मियों ने बाद में इनके शिक्षण संस्थान से नोकरी ही छोड़ दी है।तो यह है आपका अपनी ब्राह्मण विरादरी के प्रति समर्पण।आज जब हरिकिशोर तिवारी जी अपने चुनावी समर में है तो ब्राह्मणों विरादरी से उम्मीद रखते है वो इन्हें विजयी भव का आशीर्वाद दे good।
अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिये ही जाने जाते है इटावा के ब्राह्मण नेता
आगरा स्नातक खण्ड से एम एल सी का चुनाव लड़ रहे ब्राह्मण निर्दलीय प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी जी से पहले गत विधान सभा चुनाव में इटावा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में नरेन्द्रनाथ चतुर्वेदी उर्फ बल्लू चौधरी ने भी चुनाव लड़ा।इन्होंने ने भी अपना चुनाव जीतने के लिये जमकर ब्राह्मणवाद फैलाया।लेकिन फिर भी चुनाव बुरी तरह हारे।
सुखदा मिश्रा-अशोक दुबे के सिवा अन्य ब्राह्मण नेता क्यो नही सफल हुए
अब सवाल यह उठता है की इटावा की चुनावी राजनीति में पूर्व सांसद श्री शंकर तिवारी,पूर्व मंत्री सुखदा मिश्रा व पूर्व विधायक अशोक दुबे के सिवा अन्य ब्राह्मण नेता आखिर क्यों अपनी कौम के वोट व विश्वास को हसिल नही कर सके हैं?उसका सीधा सा जवाब है कि चाहे वो पूर्व ब्राह्मण प्रत्याशी नरेन्द्रनाथ चौधरी उर्फ बल्लू चौधरी रहे हो या फिर आज के एम एल सी प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी जी हो,इन लोगों ने सिर्फ अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिये ही अपनी विरादरी का प्रयोग करने की कोशिश की है।चुनाव से पहले व चुनाव के बाद इन नेताओं को फिर ब्राह्मण वाद की याद नही आती है।
कर्मचारियों के पेंशन के मुद्दे पर भी फेल हो गए हरिकिशोर तिवारी
एक समय मे कर्मचारियों की पेंशन बहाली के मुद्दे को आगरा स्नातक खण्ड के प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी ने बड़े ही जबरदस्त व आक्रामक ढंग से उठाया था फिर अचानक एक दिन सरकार के मुखिया से वार्ता के बाद हरिकिशोर तिवारी ने खुद अपने आंदोलन की हवा स्वयं क्यो निकाल दी?इस बात की हकीकत इटावा क्या प्रदेश का हर वो कर्मचारी जनता है जो इस आंदोलन से जुड़ा रहा है।
अब चुनाव के बाद हरिकिशोर तिवारी अपने ब्राह्मणवाद पर कितने खरे उतरेंगे यह तो चुनाव के बाद ही तय होगा

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