करोड़ों रुपये खर्च करके भी नहीं हुआ जो काम वो कोरोनावायरस लॉकडाउन ने किया, यमुना दिखने लगी साफ

इटावा जनपद प्रशासन

इटावा में यमुना नदी में चंबल नदी मिलने से पानी की गुणवत्ता और बढ़ जाती है. बीते 30 साल से यमुना नदी पर रिसर्च करने वाले डाक्टर राजीव चौहान भी लॉकडाउन का नदियों पर पड़ रहे असर से हैरान है.

 जिस नदी को बीते 25 साल में 5 हजार करोड़ से ज्यादा पैसे खर्च करके सरकार नहीं साफ कर पाई. उसे कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) ने साफ कर दिखाया है. लॉकडाउन के दौरान यमुना नदी न सिर्फ साफ हुई बल्कि कई दुर्लभ देसी-विदेशी पक्षी भी दिखने लगे हैं. सात राज्य और करीब 1400 किमी लंबी यमुना नदी के साफ पानी में आजकल मछलियां दिख रही है. यही नहीं ग्रे हीरोन, आईबिस पेंटेड स्टार्क जैसे तमाम देसी विदेशी पक्षी अब सालों बाद फिर से यमुना नदी के आसपास दिखने लगे हैं.

इटावा में यमुना नदी में चंबल नदी मिलने से पानी की गुणवत्ता और बढ़ जाती है. बीते 30 साल से यमुना नदी पर रिसर्च करने वाले डाक्टर राजीव चौहान भी लॉकडाउन का नदियों पर पड़ रहे असर से हैरान है. भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के संरक्षण अधिकारी डाक्टर राजीव चौहान ने कहा, “मैं साल 2000 से लगातार यमुना नदीं एक्शन प्लान से जुड़ा हूं लेकिन यमुना नदीं इतनी साफ कभी नहीं रही. इटावा में चंबल का पानी गिरने से इसमें प्रदूषण का लोड और कम हो जाता है.

यमुना सत्याग्रह के संरक्षक दीवान सिंह ने कहा कि नदियों ने अपने बॉलोजिकल कैपिसिची से अपने को साफ किया है इसीलिए सरकार को चाहिए कि औद्याहिक कचरा उसमें गिरने से रोके. अकेले पानीपत से लेकर दिल्ली तक तीन सौ से ज्यादा उद्योगों का कचरा यमुना में गिरता  है जो यमुना नदी को सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी बनाता है. 

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